Are you tired of fake friends, selfish love, and shallow connection Matlabi Shayari in Hindi perfectly expresses the pain and emotions of dealing with selfish people. From heartbreak to betrayal, our collection includes Matlabi Pyar Shayari, Matlabi Dost Shayari, Dard Matlabi Shayari, and more — lines that everyone who has faced a selfish world can relate to. Read, feel, and share these shayaris to connect with your deepest emotions.
Matlabi Log Shayari

हर किसी को अपने मतलब का ही काम होता है,
कोई नहीं मिलता जो सच्ची दोस्ती निभाता है।
ज़िंदगी भर अपनों का साथ चाहा था,
मगर मिले वही जो फ़ायदे के पीछे भागा था।
मतलबी दुनिया में ईमानदारी का कोई मोल नहीं,
हर किसी की नज़र बस अपने फ़ायदे पर ही रही।
मतलबी दुनिया में ईमानदारी की क़दर नहीं,
हर रिश्ता यहाँ मतलब से ही जुड़ा सही।
ज़िंदगी में सब काम से काम रखते हैं,
इस दुनिया में हर कोई अपनी ख़ुशी ढूँढता है।
मतलबी दुनिया में सच्चाई की जगह नहीं,
जो भी होता है, किसी फ़ायदे के बिना नहीं।
दोस्ती और रिश्तों की बड़ी बातें करते हैं,
असल वक़्त आए तो मतलबी लोग दूर हो जाते हैं।
ज़िंदगी की राहों में अपने मतलब की चाह रहती है,
हर इंसान बस अपने फ़ायदे के लिए ही जीता है।
मतलबी लोग शायरी दो लाइन

लोग हाल पूछते हैं, साथ नहीं देते,
मतलबी दुनिया में बस काम की बातें होती हैं।
कुछ रिश्ते ज़रूरत तक ही चलते हैं,
काम निकलते ही चेहरे बदल जाते हैं।
भरोसा दिल से किया था जिन पर,
वही सबसे पहले मतलब निकाल गए।
ज़रूरत में जो पास आए थे,
वक़्त बदला तो अजनबी बन गए।
हर मुस्कान अपनापन नहीं होती,
कई चेहरे सिर्फ़ फ़ायदे के लिए होते हैं।
मतलब खत्म होते ही रिश्ते टूट गए,
सच कहूँ तो दर्द चुपचाप बढ़ गया।
साथ का वादा बहुतों ने किया,
लेकिन निभाने वाला कोई नहीं मिला।
दिल साफ़ रखा मैंने हमेशा,
इसलिए मतलबी लोगों से हार गया।
काम था तो सब अपने लगे,
काम ख़त्म हुआ तो सब दूर चले गए।
सच बोलने वालों की क़दर नहीं यहाँ,
मतलबी लोगों का ही बोलबाला है।
रिश्तों में आजकल मुनाफ़ा देखा जाता है,
इंसान कम और मतलब ज़्यादा समझा जाता है।
अकेला रहना अब बेहतर लगता है,
कम से कम मतलब तो नहीं निकलता।
Matlabi Dost Shayari in Hindi

मुश्किलों में आवाज़ दी थी सबको,
मगर वहाँ सिर्फ़ खामोशी और मतलबी यार मिले।
ज़रूरत के वक़्त जो अपने बन बैठे थे,
वक़्त बदला तो वही लोग सबसे पहले दूर हो गए।
भरोसे की नींव पर रिश्ते बनाए थे मैंने,
पर हर ईंट के पीछे मतलब छुपा हुआ निकला।
साथ निभाने के बड़े वादे किए गए थे,
लेकिन काम निकलते ही सबने रास्ता बदल लिया।
दिल खोलकर निभाया हर रिश्ता मैंने,
सामने से हर बार सिर्फ़ फ़ायदे का हिसाब मिला।
वक़्त ने सिखा दिया एक कड़वा सा सच,
मतलबी लोग भीड़ में बहुत, अपने बहुत कम।
दर्द में जो नाम पुकारे गए थे,
वही नाम आज अजनबी से लगते हैं।
खुशी में ताली बजाने वाले तो बहुत थे,
आँसू गिरते ही सबकी नज़रें झुक गईं।
रिश्तों को मैंने दिल से निभाना चाहा,
पर दुनिया ने उन्हें सौदे की तरह समझा।
सच्चाई के साथ चलना भारी पड़ गया,
क्योंकि यहाँ झूठ और मतलब साथ चलते हैं।
अकेलापन अब डराता नहीं मुझे,
मतलबी लोगों के बीच रहने से बेहतर है।
अब किसी से शिकायत भी नहीं रही,
मतलबी दुनिया से यही उम्मीद थी मुझे।
Matlabi Pyar Shayari

इश्क़ का नाम देकर दिल से खेला गया,
मतलबी प्यार में बस अपना फ़ायदा देखा गया।
ज़रूरत तक ही चाहत निभाई गई,
काम निकलते ही मोहब्बत भुला दी गई।
दिल लगाया था सच्चाई के भरोसे पर,
सामने वाला प्यार को सौदा समझ बैठा।
वक़्त अच्छा था तो बातें भी खास थीं,
मुश्किल आई तो मोहब्बत भी पास नहीं थी।
प्यार में अपनापन ढूँढता रहा मैं,
वो हर लम्हा अपना मतलब निकालते रहे।
सच्ची भावनाएँ भारी पड़ गईं मुझे,
मतलबी प्यार को बस आसान दिल चाहिए था।
रिश्ते को दिल से निभाया मैंने,
उन्होंने उसे ज़रूरत तक ही रखा।
चाहत जताई गई सिर्फ़ मौक़े पर,
मतलबी प्यार का यही सच निकला।
वो पास तब तक रहे जब तक काम था,
प्यार नहीं, बस फ़ायदे का नाम था।
दिल टूटने का दर्द कम होता,
अगर प्यार में मतलब शामिल न होता।
मैंने मोहब्बत को इबादत समझा,
उन्होंने उसे इस्तेमाल समझ लिया।
अब प्यार से थोड़ा डर लगने लगा है,
मतलबी दिलों ने बहुत सबक सिखा दिया है।
Matlabi Khudgarz Shayari

मुश्किल घड़ी में जिनका नाम लिया था,
वही खुदगर्ज़ लोग सबसे पहले नज़रें चुरा गए।
ज़रूरतों ने रिश्तों की असलियत दिखा दी,
मतलबी सोच ने हर अपनापन तोड़ दिया।
भरोसे की बातों पर दिल लगा बैठे थे हम,
खुदगर्ज़ दिलों ने उसे कमजोरी समझ लिया।
साथ निभाने के बड़े वादे किए गए थे,
मगर मौका आया तो सब अपने रास्ते मुड़ गए।
दिल से निभाया हर रिश्ता बिना किसी हिसाब के,
सामने वाले ने हर पल फ़ायदे का हिसाब रखा।
वक़्त बदलते ही चेहरे भी बदल गए,
मतलबी दुनिया में यही सबसे आसान सच है।
दर्द में कोई कंधा देने नहीं आया,
खुदगर्ज़ लोग बस बातें करना जानते हैं।
रिश्तों को मैंने सच्चाई से जोड़ना चाहा,
उन्होंने उन्हें ज़रूरत का साधन बना लिया।
खामोशी अब शिकायत नहीं करती,
क्योंकि खुदगर्ज़ी ने बहुत कुछ सिखा दिया है।
सच्चे रहने की कीमत भारी पड़ी,
क्योंकि खुदगर्ज़ी यहाँ समझदारी कहलाती है।
अब कम लोग, कम उम्मीदें, ज़्यादा सुकून है,
मतलबी दिलों से दूरी ने जीना सिखा दिया है।
Matlabi Duniya Shayari in Hindi

दुनिया में आज सब रिश्ते सिर्फ़ फ़ायदे के लिए हैं,
अपनापन ढूँढो तो बस खामोशी ही मिलती है।
ज़रूरत में सब पास आते हैं,
काम ख़त्म होते ही सब दूर हो जाते हैं।
दिल से निभाए गए रिश्ते अक्सर टूट जाते हैं,
मतलबी सोच सब कुछ तोड़ कर छोड़ देती है।
सच्चाई के रास्ते पर चलना मुश्किल है,
क्योंकि यहाँ हर कोई बस फ़ायदे में रहता है।
वक़्त बदलते ही लोग बदल जाते हैं,
मतलबी दुनिया में यही असली सच है।
खुशी में सब अपने,
दर्द में कोई नहीं।
रिश्तों की कीमत यहाँ भावनाओं से नहीं,
मतलब से तौली जाती है।
साथ निभाने का वादा बहुतों ने किया,
पर मुश्किल आई तो सब दूर हो गए।
मतलबी दुनिया में भरोसा करना भारी पड़ जाता है,
क्योंकि लोग रिश्तों को भी सौदे की तरह देखते हैं।
अकेलापन अब डराता नहीं मुझे,
कम से कम यहाँ धोखा तो नहीं मिलता।
सच्चाई और ईमानदारी की कोई क़दर नहीं,
मतलबी लोग ही इस दुनिया में राज करते हैं।
ज़िंदगी में उम्मीदें बहुत थीं,
मतलबी दुनिया ने सब पर पानी फेर दिया।
Dard Matlabi Shayari

दर्द में कोई पास नहीं आया,
मतलबी लोग सिर्फ़ फ़ायदे के पीछे भागे।
भरोसे की हर दीवार टूट गई,
खुदगर्ज़ दुनिया ने दिल से खेला।
साथ निभाने का वादा किया गया था,
पर मौके पर सबने धोखा दिया।
दिल लगाया था सच्चाई पर,
मगर सामने वाले ने मतलब ही देखा।
दर्द बांटने वाला कोई नहीं मिला,
मतलबी लोग बस बातें ही करते हैं।
ज़रूरत में हाथ पकड़ने आए थे,
काम ख़त्म होते ही सब दूर हो गए।
रिश्तों में अपनापन ढूँढा,
मगर हर चेहरा सिर्फ़ फ़ायदे का निकला।
खामोशी ही अब सबसे अच्छा सहारा है,
मतलबी दुनिया में शब्दों का कोई मोल नहीं।
सच्चाई जताई, प्यार दिया,
पर बदले में सिर्फ़ दूरी और धोखा मिला।
अब उम्मीदें कम हैं, लेकिन दिल हल्का है,
क्योंकि खुदगर्ज़ लोगों से दूरी सुकून देती है।
हर मुस्कान के पीछे मतलब छुपा था,
इस दुनिया में कोई भी बिना फ़ायदे के नहीं था।
कभी दिल खोला तो धोखा ही मिला,
मतलबी लोग भीड़ में सबसे अलग नज़र आते हैं।
साथ का वादा बहुतों ने किया,
पर ज़रूरत में सबने राह बदल ली।
दिल टूटते हुए भी चुप रहा,
क्योंकि यहाँ दर्द में कोई अपना नहीं होता।
अब किसी पर भरोसा करना मुश्किल है,
मतलबी दुनिया ने हर चीज़ का रंग बदल दिया।
Matlabi Pyar Shayari

इश्क़ जताया तो सच्चाई की उम्मीद थी,
मतलबी प्यार ने सिर्फ़ धोखा ही दिया।
पास आया तब तक जब तक फ़ायदा था,
काम ख़त्म होते ही मोहब्बत भी दूर हो गई।
दिल लगाया था पूरे विश्वास के साथ,
मगर सामने वाले ने इसे खेल समझा।
चाहत जताई तो मुस्कुराहट दिखी,
मगर पीछे बस अपना मतलब छुपा था।
साथ निभाने का वादा किया गया,
पर मौके पर सबने फ़ायदा देखा।
प्यार में अपनापन ढूँढा,
मगर हर चेहरा सिर्फ़ फ़ायदे का निकला।
इश्क़ में दिए गए हर वादे झूठ निकले,
मतलबी प्यार ने दिल तोड़ दिया।
दिल की सच्चाई को समझा कोई नहीं,
सिर्फ़ अपने मतलब में ही सब व्यस्त रहे।
सच्चाई से जीना भारी पड़ गया,
मतलबी मोहब्बत ने सब कुछ बदल दिया।
ख़्वाब बुने थे प्यार के लिए,
पर हकीकत में सिर्फ़ धोखे का सामना मिला।
मुस्कान में भी छल छुपा था,
हर जज़्बात को फ़ायदे के हिसाब से तौला गया।
रिश्ते निभाने का इरादा दिखा,
पर असली वक़्त आने पर सबने छोड़ दिया।
दिल खोलकर दिया भरोसा,
मगर प्यार को सौदा समझ लिया गया।
इश्क़ में दर्द इतना मिला,
कि अब किसी पर यकीन करना मुश्किल है।
अब चुप रहना ही बेहतर लगता है,
क्योंकि मतलबी प्यार ने सब कुछ सीखा दिया।
Matlabi Rishte Shayari

ज़रूरत में जो पास आए,
वक़्त बदलते ही सब दूर हो गए।
रिश्तों की कदर यहाँ भावनाओं से नहीं,
मतलब से तौली जाती है।
साथ निभाने का वादा बहुतों ने किया,
पर मुश्किल आई तो सब पीछे हट गए।
दिल लगाया था सच्चाई से,
मगर सामने वाले ने फ़ायदा देखा।
अपनापन जताया,
मगर हर चेहरा बस मतलब का निकला।
भरोसे की नींव पर रिश्ते बनाए थे,
मतलबी लोग उसे तोड़ कर चले गए।
सच्चाई से निभाया हर रिश्ता,
पर बदले में सिर्फ़ धोखा मिला।
ज़िंदगी में उम्मीदें बहुत थीं,
मतलबी रिश्तों ने सब पर पानी फेर दिया।
रिश्तों की गर्माहट तलाशते रहे,
मगर यहां सब रिश्ते ठंडी और फ़ायदे वाली निकली।
साथ का वादा किया गया,
पर मुश्किल में कोई भी साथ नहीं मिला।
दिल टूटकर भी चुप रहा,
क्योंकि यहाँ भरोसे के लायक कोई नहीं।
कभी दिल खोला तो धोखा ही मिला,
मतलबी रिश्तों ने अकेला छोड़ दिया।
रिश्तों में अपनापन ढूँढा,
पर सबने सिर्फ़ फ़ायदा ही निकाला।
अब उम्मीदें कम हैं,
लेकिन खुद को संभालना सीख लिया।
खामोशी ही अब सबसे अच्छा सहारा है,
मतलबी रिश्तों में शब्दों का कोई मोल नहीं।
